गर्मी की वह आग जो नहीं बुझती: भारत और उसके राज्यों में लू का कहर
अप्रैल 2026 का महीना भारत के लिए एक बार फिर वही पुरानी कहानी लेकर आया है, लेकिन इस बार थोड़ा और ज़्यादा तेवर के साथ। देश की राजधानी से लेकर दक्षिण के पठारों तक, उत्तर के पहाड़ी राज्यों से लेकर पूर्वी तटों तक, पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है। अकोला, जो महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित है, ने 44.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया, जबकि अमरावती (44 डिग्री), वर्धा (43.9) और नागपुर (43.4) ने शीर्ष चार स्थानों पर कब्जा कर लिया । यह सिर्फ एक मौसमी अपडेट नहीं है; यह एक चेतावनी है कि भारत में गर्मी की लहरें (Heatwaves) अब एक नई, और अधिक खतरनाक, सामान्य स्थिति बनती जा रही हैं।
कब कहा जाता है ‘लू’?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, लू की घोषणा तब की जाती है जब किसी मैदानी इलाके का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाए, या फिर सामान्य तापमान से 4.5 से 6.4 डिग्री अधिक बढ़ जाए। अगर यह अंतर 6.4 डिग्री से भी ज्यादा हो जाए, तो उसे ‘भीषण लू (Severe Heatwave)’ की श्रेणी दी जाती है ।
वर्ष 2026 की शुरुआत ने इस परिभाषा को और विस्तार दिया है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में, जहाँ गर्मियां आमतौर पर सुहावनी होती हैं, मार्च के पहले ही हफ्ते में भीषण लू ने दस्तक दे दी। 6 मार्च, 2026 को राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से 8 से 12 डिग्री अधिक दर्ज किया गया । यह पिछले पांच वर्षों में सबसे जल्दी आई लू थी, जो बताता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब हीटवेव का सीजन लंबा होता जा रहा है और यह पहले शुरू हो रहा है।
राज्य-दर-राज्य: कहाँ क्या हाल है?
गर्मी की यह मार पूरे देश में व्यापक है, हालाँकि इसकी तीव्रता क्षेत्र विशेष में भिन्न है:
महाराष्ट्र: विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं। IMD ने अकोला, अमरावती, नागपुर, सांगली और सोलापुर जिलों में अगले पांच दिनों के लिए लू की चेतावनी (येलो अलर्ट) जारी की है । यहाँ एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण नमी की कमी हो रही है और तापमान लगातार बढ़ रहा है।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश: यहाँ की स्थिति और भी गंभीर है। तेलंगाना के निजामाबाद जिले में तापमान 43.2 डिग्री पहुंच गया, और आईएमडी ने 16 अप्रैल तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है । आंध्र प्रदेश में कुरनूल ने 42.1 डिग्री दर्ज किया, और राज्य के 51 मंडलों में भीषण लू चल रही है । आने वाले दिनों में तेलंगाना, रायलसीमा और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 20 अप्रैल तक तापमान 41 से 44 डिग्री के बीच रहने का पूर्वानुमान है ।
कर्नाटक: कालाबुर्गी (गुलबर्गा) 42 डिग्री के साथ सबसे गर्म स्थान रहा, जबकि बीदर, बल्लारी और कोप्पल में हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी बेंगलुरु का तापमान 35.6 डिग्री तक पहुंच गया है, जो यहाँ के सुहावने मौसम के लिहाज से असामान्य है ।
ओडिशा: भुवनेश्वर लगातार गर्मी की चपेट में है। यहाँ 2024 में 230 दिनों तक येलो या ऑरेंज हीट अलर्ट जारी रहा था। रात का तापमान भी बढ़ने से लोगों को राहत नहीं मिल पाती, जिसे ‘अर्बन हीट आइलैंड’ इफेक्ट के नाम से जाना जाता है ।
केवल तापमान ही नहीं, उमस भी है खतरनाक
लू का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है। आर्द्रता (Humidity) इसे और भी जानलेवा बना देती है। हीट इंडेक्स, जो तापमान और नमी के संयोजन को मापता है, दर्शाता है कि असली गर्मी अक्सर थर्मामीटर से भी ज्यादा होती है।
शोध बताते हैं कि गरीबी रेखा पर जीवन यापन करने वाले करोड़ों भारतीयों के घरों के अंदर का तापमान बाहर से भी अधिक होता है। नई दिल्ली की झुग्गियों में रात का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था । इसका मतलब है कि जो लोग दिनभर धूप में काम करते हैं (जैसे निर्माण मजदूर, रिक्शा चालक), वे रात को आराम करने के लिए जिस घर लौटते हैं, वहाँ उन्हें ‘कूलिंग रिफ्यूज’ नहीं मिल पाता। इससे हीट स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है ।
बदलता मानसून और अल नीनो का साया
वर्ष 2026 में एक और चिंता अल नीनो (El Niño) के बढ़ते खतरे की है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल प्रशांत महासागर में ला नीना की स्थितियाँ समाप्त हो रही हैं और एल नीनो के बनने के संकेत मिल रहे हैं । एल नीनो का सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ता है, जिससे बारिश कमजोर होती है। कमजोर मानसून का मतलब है गर्मियों के अंत में भी गर्मी से राहत नहीं मिलना, और गर्मी की लहरें और लंबी खिंच सकती हैं।
राहत के उपाय: सरकारी स्तर पर क्या हो रहा है?
लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए, भारत सरकार अब सिर्फ राहत कार्यों से आगे बढ़कर ‘हीट एक्शन प्लान’ (HAP) पर काम कर रही है। अहमदाबाद, जहाँ पहली बार ऐसी योजना लागू हुई थी, आज एक मॉडल बन चुका है। अब देशभर के 250 से अधिक शहरों और जिलों में हीट एक्शन प्लान लागू हैं ।
हाल ही में भुवनेश्वर ने देश की पहली इंटीग्रेटेड हीट एंड कूलिंग एक्शन प्लान (IHCAP) लॉन्च की है। यह योजना न केवल लू से बचाव पर केंद्रित है, बल्कि एयर कंडीशनिंग (AC) के बढ़ते उपयोग को रोकने पर भी जोर देती है। AC का अत्यधिक उपयोग ग्रीनहाउस गैसों को बढ़ाता है और शहरों को और गर्म करता है। इस योजना के तहत कूल रूफ्स (ठंडी छतें), शहरी वनरोपण और जल स्रोतों के संरक्षण जैसे उपाय सुझाए गए हैं ।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने भी हाल ही में स्वीकार किया कि अब हीटवेव को सिर्फ आपदा के तौर पर देखने के बजाय दीर्घकालिक जोखिम प्रबंधन का हिस्सा बनाना होगा। सरकार ने राज्यों को हीटवेव शमन (mitigation) के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (SDRF) के पैसे इस्तेमाल करने की अनुमति भी दे दी है ।
क्या करें, क्या न करें
जब तक बड़े बुनियादी बदलाव नहीं होते, तब तक व्यक्तिगत स्तर पर सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है:
क्या करें: दिन के सबसे गर्म समय (दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे) के दौरान धूप में निकलने से बचें। ढीले, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें। भरपूर पानी पीयें, भले ही प्यास न लगी हो। अगर चक्कर या मिचली महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।
क्या न करें: बिना ढके सिर के धूप में न जाएं। पेट भारी भोजन या प्रोटीन युक्त आहार से बचें क्योंकि इससे शरीर की गर्मी बढ़ती है। बच्चों, बुजुर्गों और पालतू जानवरों को बंद कारों में अकेला न छोड़ें।
भारत में हीटवेव अब मौसम का एक अस्थायी झोंका नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक संकट बन चुकी है। यह न केवल हमारी सहनशीलता की, बल्कि हमारी शहरी योजना, निर्माण सामग्री, आर्थिक असमानता और स्वास्थ्य व्यवस्था की परीक्षा लेती है। आवश्यकता इस बात की है कि हम गर्मी को केवल एक संख्या के रूप में न देखकर, एक चुपचाप आती महामारी की तरह पहचानें और इससे निपटने के लिए तत्काल, ठोस कदम उठाएं। जब तक ऐसा नहीं होता, अकोला का 44 डिग्री का रिकॉर्ड शायद जल्द ही टूट जाएगा, और हम उस नई ऊंचाई को नया ‘सामान्य’ कहने लगेंगे।
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