Noida विकास की दहलीज पर संघर्ष की तस्वीर

                    

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नोएडा। एशिया के सबसे बड़े नियोजित औद्योगिक शहरों में शुमार नोएडा आज एक बार फिर सुर्खियों में है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार ने यहां के मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को मंजूरी देकर शहर को ‘स्मार्ट कनेक्टिविटी’ की नई राह दिखाई है, वहीं दूसरी तरफ फेक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों की बढ़ती महंगाई और कम वेतन के खिलाफ उठी आवाज ने सड़कों पर हिंसक रूप ले लिया है। पिछले 24 घंटों में नोएडा ने प्रगति और विरोध के दो विपरीत चेहरे एक साथ देखे हैं।

फैक्ट्रियों में उबाल: मजदूरों का विरोध और हिंसा

लेकिन विकास की इन तस्वीरों के बीच नोएडा की सड़कों पर एक और सच्चाई सामने आई है। सोमवार को नोएडा के फेज-2 और सेक्टर 60 इलाकों में फैक्ट्री मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया ।

मजदूर लंबे समय से अपने वेतन में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच उनकी तनख्वाह में बमुश्किल 280-300 रुपये की वृद्धि होती है, जबकि हर साल उनके किराए में 500 रुपये का इजाफा हो जाता है । एक महिला मजदूर मंजू देवी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह 12 घंटे की मेहनत करने के बाद भी महज 13,000 रुपये प्रतिमाह कमा पाती हैं और चार बच्चों का पेट पालना उनके लिए मुश्किल हो गया है ।

गुस्साए मजदूरों ने सड़कों पर जाम लगा दिया, पथराव किया और एक वाहन को आग के हवाले कर दिया । सूचना मिलने पर पुलिस को मौके पर भारी बल तैनात करना पड़ा। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे ।

हालांकि, संघर्ष के इस दौर में जिला प्रशासन ने संयम बरतने की अपील की है। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने श्रमिक हितों की रक्षा, ओवरटाइम के दोगुने भुगतान और बोनस जैसे मुद्दों पर श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की है ।

मेट्रो का विस्तार: नई रफ्तार का ऐलान

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नोएडा मेट्रो के एक्वा लाइन विस्तार को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत नोएडा के सेक्टर 142 से बोटैनिकल गार्डन के बीच 11.56 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें 8 नए स्टेशन बनेंगे ।

यह विस्तार महज एक निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि नोएडा की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने वाली एक रीढ़ है। इस कॉरिडोर के बन जाने के बाद सेक्टर 142 से बोटैनिकल गार्डन तक का सफर काफी आसान हो जाएगा। विशेष बात यह है कि बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन अब दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और मैजेंटा लाइन के साथ इंटरचेंज का केंद्र बन जाएगा । इसका सीधा फायदा नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों लोगों को होगा जो रोजाना दिल्ली आना-जाना करते हैं।

इस परियोजना की लागत करीब 2,254 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसके चार साल में पूरा होने की उम्मीद है । इसके पूरा होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक्टिव मेट्रो नेटवर्क 61.62 किलोमीटर का हो जाएगा ।

सिर्फ मेट्रो ही नहीं, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 24 औद्योगिक प्लॉट भी आवंटन के लिए निकाले हैं। ये प्लॉट इकोटेक-1, इकोटेक-6, और सेक्टर 16 जैसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनका उद्देश्य नोएडा को मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करना है । यह कदम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तैयारियों के मद्देनजर भी अहम है।

सन्तुलन की तलाश

नोएडा आज एक चौराहे पर खड़ा है। एक ओर, शानदार मॉल्स, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तर और मेट्रो के विस्तार से शहर ‘भविष्य’ की ओर बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, वही मजदूर जो इन इमारतों और फैक्ट्रियों की नींव रखते हैं, मूलभूत जरूरतों के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।

अगर नोएडा को सही मायने में ‘स्मार्ट सिटी’ बनना है, तो उसे ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों के साथ-साथ अपने मजदूरों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की भी जरूरत है। विकास तभी सार्थक होगा जब यह सबके लिए समान हो, न कि सिर्फ एक तबके के लिए ।


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