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इजरायल-ईरान युद्ध: 29वें दिन हूती बलों के शामिल होने से बढ़ी तनाव की आशंका, अमेरिका ने तैनात किए 3,500 मरीन


तेहरान/तेल अवीव | मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने अपने 29वें दिन प्रवेश करते ही एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। यमन के हूती विद्रोहियों के सक्रिय रूप से संघर्ष में शामिल होने से यह क्षेत्रीय टकराव और अधिक जटिल हो गया है, जिससे तत्काल संघर्ष विराम की उम्मीदें फिलहाल धूमिल हो गई हैं। इस बीच, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाते हुए 3,500 मरीन और नाविकों को तैनात किया है, जबकि ईरान ने अपने बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का जवाब देने की कड़ी चेतावनी दी है .


युद्ध का नया मोर्चा: हूती बलों का इजरायल पर हमला


सबसे बड़ा घटनाक्रम शनिवार को तब सामने आया जब ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी इजरायल में संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल हमला किया। यह 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से हूती बलों का पहला हमला था। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने इस मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया, हालांकि इस घटना ने पूरे दक्षिणी इजरायल में हवाई हमले की सायरन बजा दिए, जिससे हजारों लोग बम आश्रयों की ओर भाग गए ।


हूती बलों के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान, लेबनान और इराक पर हो रहे हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि हूती बलों का यह कदम युद्ध को एक नए मोर्चे पर ले जा सकता है। उनकी सबसे बड़ी ताकत लाल सागर में शिपिंग को बाधित करने की क्षमता है। यदि हूती लाल सागर में तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर हमले फिर से शुरू करते हैं, तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जो पहले से ही बंद हार्मुज जलडमरूमध्य के कारण संकट में है ।


अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई


इजरायल ने युद्ध के 29वें दिन तक ईरान की सैन्य क्षमताओं को लगभग ध्वस्त करने की बात कही है। IDF के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि उनकी सेना ईरान के सैन्य उद्योग के सभी महत्वपूर्ण घटकों पर हमले पूरे करने वाली है। उन्होंने दावा किया, "इसका मतलब है कि हम ईरान की अधिकांश सैन्य उत्पादन क्षमता को नष्ट कर देंगे, जिसे बहाल करने में ईरानी शासन को लंबा समय लगेगा" ।


इसी कड़ी में इजरायल ने बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर भी हमला किया, जो तीन दिनों में तीसरी बार यह संयंत्र लक्ष्य बना। अमेरिका ने पहले ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से परहेज करने को कहा था, लेकिन इजरायल ने इस परामर्श को दरकिनार कर दिया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के हमलों से बड़ा विकिरण संकट पैदा हो सकता था ।


अमेरिका ने भी अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि USS ट्रिपोली नामक युद्धपोत के नेतृत्व में 3,500 मरीन और नाविक मध्य पूर्व में पहुंच गए हैं। इसके अलावा, पेंटागन ईरान में जमीनी अभियानों की भी योजना बना रहा है। हालांकि, यह पूर्ण पैमाने पर आक्रमण नहीं होगा, बल्कि खार्ग द्वीप और हार्मुज जलडमरूमध्य के पास के तटीय क्षेत्रों में सीमित अवधि के लिए विशेष बलों की छापेमारी शामिल हो सकती है ।


ईरान का जवाब और क्षेत्रीय प्रभाव


ईरान ने इन हमलों के जवाब में कड़ी प्रतिक्रिया देने की बात कही है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने चेतावनी दी कि उनके देश के बुनियादी ढांचे और आर्थिक केंद्रों पर किसी भी हमले का जोरदार जवाब दिया जाएगा ।


ईरान की ओर से हमले केवल इजरायल तक सीमित नहीं रहे। दुबई में यूक्रेनी ड्रोन रक्षा प्रणाली के गोदाम को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मिसाइल से नष्ट कर दिया। सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी हमला हुआ, जिसमें कम से कम 15 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रडार सिस्टम को ड्रोन हमलों से क्षति पहुंची है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बैलिस्टिक मिसाइल के मलबे से पांच भारतीय नागरिक घायल हुए ।


इस क्षेत्रीय विस्तार के बीच, ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन अमेरिका और इजरायल को युद्ध संचालन के लिए इस्तेमाल न करने दें। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिका को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर उसने ईरानी विश्वविद्यालयों पर हमले की निंदा नहीं की, तो उसके मध्य पूर्व में स्थित विश्वविद्यालयों को निशाना बनाया जाएगा .


राजनयिक प्रयास और जन आंदोलन


हालांकि युद्ध जारी है, लेकिन राजनयिक मोर्चे पर भी हलचल है। अमेरिका ने 15-सूत्रीय शांति योजना प्रस्तावित की है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने और मिसाइलों पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। पाकिस्तान सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर रहा है ताकि युद्ध विराम के लिए ठोस प्रयास किए जा सकें .


इन प्रयासों के बावजूद, युद्ध के आर्थिक और सामाजिक परिणाम गहराते जा रहे हैं। लेबनान में 22 प्रतिशत कृषि भूमि नष्ट हो चुकी है। पाकिस्तान में युद्ध के कारण जेट ईंधन के दाम में पांचवीं बार वृद्धि हुई है .


वैश्विक स्तर पर, इस युद्ध का विरोध भी बढ़ रहा है। अमेरिका में 'नो किंग्स' (No Kings) नाम से लाखों लोगों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन किया। इजरायल में भी तेल अवीव में सैकड़ों लोगों ने हिंसक प्रदर्शन किया .


युद्ध के 29वें दिन यह स्पष्ट हो गया है कि यह संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रह गया है। हूती विद्रोहियों का प्रवेश, खाड़ी देशों पर हमले और अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह क्षेत्रीय युद्ध अब पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले चुका है।


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