प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना 2026: युवाओं के लिए अवसर 

           

PM Internship 2026

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, और इस युवा आबादी को कौशल और रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी कड़ी में, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme - PMIS) की शुरुआत की थी। यह योजना, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के बजट में पेश किया था, अगले पांच वर्षों में देश के शीर्ष 500 कंपनियों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप देने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखती है ।

हालांकि, 2026 में इस योजना के तीसरे दौर की शुरुआत के साथ, इसकी चुनौतियां और संभावनाएं दोनों ही स्पष्ट हो रही हैं। जहां एक ओर सरकार ने इसे और अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल ऐप लॉन्च किया और भागीदार कंपनियों की संख्या बढ़ाई, वहीं दूसरी ओर बजट आवंटन में भारी कटौती और कम स्वीकृति दर जैसे मुद्दे इस योजना के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आइए, इस लेख में हम पीएम इंटर्नशिप योजना 2026 की पूरी जानकारी, इसके लाभ, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

                      

PM Internship

पीएम इंटर्नशिप योजना 2026 का परिचय और उद्देश्य


प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) के तहत संचालित एक केंद्रीय योजना है । इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक ज्ञान और उद्योग की मांग के बीच की खाई को पाटना है। परंपरागत शिक्षा प्रणाली में अक्सर व्यावहारिक अनुभव की कमी रह जाती है, जिससे युवा डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए आवश्यक कौशल नहीं सीख पाते। इस योजना के माध्यम से सरकार युवाओं को देश की शीर्ष कंपनियों में 12 महीने का प्रशिक्षण देकर उन्हें "इंडस्ट्री-रेडी" बनाना चाहती है ।


पात्रता (Eligibility) क्या है?

यदि आप 2026 में इस योजना के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य है:

· आयु सीमा: आवेदक की आयु 21 से 24 वर्ष के बीच होनी चाहिए ।
· शैक्षणिक योग्यता: न्यूनतम योग्यता कक्षा 10वीं उत्तीर्ण होना है। इसके अलावा, 12वीं, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, डिप्लोमा या स्नातक (ग्रेजुएशन) करने वाले युवा भी आवेदन कर सकते हैं ।
· आय सीमा: परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए ।
· नकारात्मक पात्रता:
  · जो उम्मीदवार पूर्णकालिक नौकरी (Full-time Employment) कर रहे हैं, वे पात्र नहीं हैं।
  · जो नियमित कॉलेज (Full-time Regular Education) में पढ़ रहे हैं, वे भी आवेदन नहीं कर सकते।
  · आईआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, आईआईएसईआर, सीए, सीएस, सीएमए, एमबीए, एमबीबीएस जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के स्नातक या उच्च डिग्री धारक पात्र नहीं हैं ।


वित्तीय लाभ और सुविधाएं

यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है। इसमें मिलने वाले लाभ इस प्रकार हैं:

· मासिक वजीफा (Stipend): प्रति माह 5,000 रुपये (इसमें से 4,500 रुपये सरकार और 500 रुपये कंपनी की सीएसआर फंड से देती है) ।
  · नया अपडेट: मार्च 2026 में शुरू हुए तीसरे दौर में कुछ कंपनियों में न्यूनतम वित्तीय सहायता 9,000 रुपये प्रति माह तक बढ़ा दी गई है ।
· एकमुश्त सहायता राशि: इंटर्नशिप शुरू करने पर 6,000 रुपये की एकमुश्त राशि (Joining Allowance) डीबीटी के माध्यम से दी जाती है ।
· बीमा कवर: इंटर्न को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत कवर किया जाता है ।
· प्रमाणपत्र: इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी करने पर सरकार और कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से डिजिटल प्रमाणपत्र दिया जाता है, जो नौकरी के लिए आवेदन में सहायक होता है ।

आवेदन प्रक्रिया (स्टेप बाय स्टेप गाइड)

2026 में इस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है। इसे आप वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकते हैं।

1. ऑफिशियल पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pminternship.mca.gov.in/ पर जाएं या Google Play Store से "PM Internship" मोबाइल ऐप डाउनलोड करें ।
2. रजिस्ट्रेशन करें: 'यूथ रजिस्ट्रेशन' पर क्लिक करें और अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी दर्ज करें। OTP के माध्यम से सत्यापन करें और पासवर्ड सेट करें ।
3. प्रोफाइल पूरा करें: लॉगिन करने के बाद, अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता, पता, बैंक खाता विवरण और कौशल (Skills) को अपडेट करें। ई-केवाईसी (eKYC) पूरी करना अनिवार्य है ।
4. इंटर्नशिप चुनें: 'इंटर्नशिप अपॉर्चुनिटी' सेक्शन में जाएं। यहां आप सेक्टर, लोकेशन और कंपनी के आधार पर फिल्टर कर सकते हैं। आप अधिकतम तीन इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं ।
5. आवेदन सबमिट करें: अपनी पसंद की इंटर्नशिप का चयन करें, 'अप्लाई' बटन दबाएं और घोषणा पत्र (Declaration) को स्वीकार करें।
6. स्थिति ट्रैक करें: आवेदन करने के बाद, आप 'माई एप्लीकेशन' में जाकर शॉर्टलिस्टिंग और ऑफर की स्थिति देख सकते हैं ।
वर्तमान स्थिति: बजट में कटौती और चुनौतियां

हालांकि इस योजना की सराहना की गई है, लेकिन 2026 के केंद्रीय बजट में इसके कार्यान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का बजट आवंटन 56% घटाकर 4,788 करोड़ रुपये कर दिया गया है । यह कटौती पिछले वर्षों में धन के कम उपयोग (Underutilisation of Funds) के कारण की गई है।

· कम खर्च: नियंत्रक महालेखाकार (CGA) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इस योजना पर मात्र 32 करोड़ रुपये खर्च हुए। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों में भी, 10,800 करोड़ रुपये के आवंटन के मुकाबले मात्र 500 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके ।
· कम स्वीकृति दर: चिंता की एक और बड़ी वजह यह है कि शुरुआती चरणों में ऑफर किए गए इंटर्नशिप में से एक तिहाई से भी कम को उम्मीदवारों ने स्वीकार किया। पहले पायलट चरण (अक्टूबर-दिसंबर 2024) में 82,000 ऑफर के सामने केवल 28,000 ने स्वीकार किया और मात्र 8,700 ने ज्वाइन किया ।
· अपर्याप्त वजीफा: योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती 5,000 रुपये का वजीफा है, जो शहरी क्षेत्रों में रहने, खाने और यातायात के खर्चों को पूरा नहीं कर पाता। इंटर्न का कहना है कि यह राशि महंगाई के इस दौर में न्यूनतम जरूरतों को भी पूरा नहीं करती, जिससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के युवा इससे दूर हो रहे हैं ।

सुधार की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करती है, तो यह योजना सफल हो सकती है:

1. वजीफे में संशोधन: वजीफे को शहरों के रहन-सहन के खर्च के अनुरूप बढ़ाया जाना चाहिए ।
2. प्रशिक्षण की गुणवत्ता: कंपनियों में संरचित मार्गदर्शन (Mentorship) की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि इंटर्न को केवल सामान्य काम न सौंपे जाएं, बल्कि वास्तविक कौशल सीखने को मिले ।
3. कंपनियों का विस्तार: सिर्फ टॉप 500 कंपनियों तक सीमित रहने के बजाय, इसमें एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म्स (जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म्स) को भी शामिल किया जाना चाहिए ।


प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना 2026 भारत के युवाओं के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसका उद्देश्य "डिग्रीधारी बेरोजगार" की समस्या को "कौशलयुक्त कार्यबल" में बदलना है। हालांकि, बजट में कटौती और पहले चरणों में मिली चुनौतियां यह संकेत देती हैं कि केवल योजना बनाना भर पर्याप्त नहीं है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए वजीफे में वृद्धि, कंपनियों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करना और योजना की बेहतर ब्रांडिंग करना आवश्यक है। यदि इन पहलुओं पर ध्यान दिया गया, तो यह योजना वास्तव में युवाओं को सशक्त बनाने और भारत को "स्किल कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड" बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।

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